adolf hitler and narendra modi

एडोल्फ हिटलर बहुत महत्वकांक्षी व्यक्ति था और कई बार महत्वाकांक्षा आप को अंधा कर देती है तो द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान 1941 में जर्मनी लगातार पश्चिमी मोर्चों पर मित्र राष्ट्रों से लड़ा था और ब्रिटिश वायु सेना भीषण हवाई बमबारी कर रही थी तभी हिटलर ने पूर्वी मोर्चा खोल दिया और रूस पर चढ़ाई कर दी. हिटलर ने अपनी ताकत को ज्यादा करके आका, पर रूस का मौसम और रूसियों के लड़ने की हिम्मत भारी पड़ी और जर्मनी को भयंकर नुकसान उठाना पड़ा रूस में. रूस से भागते हुए जर्मन सैनिकों को जर्मनी की राजधानी बर्लिन तक रूसी सैनिकों ने खदेड़ा जिसको बर्लिन का गिरना भी कहते हैं और एडोल्फ हिटलर को अपनी प्रेमिका के साथ आत्महत्या करनी पड़ी.

अब आते हैं वर्तमान पर, किसान दिल्ली की सीमाओं पर डटा हुआ है और किसान आंदोलन के नेता देश के तमाम राज्य में जाकर समर्थन मांग रहे हैं और भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ लोगों को वोट करने के लिए अपील कर रहे हैं. पूरे देश में छात्र नौकरी के लिए आंदोलन कर रहे हैं, सरकारी उपक्रम के कर्मचारी निजीकरण के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं और उसी समय पहले से तनावग्रस्त फेडरल ढांचे पर लगातार दबाव बढ़ रहा है और इसके कई कारण हैं, पर उसमें सबसे बड़ा कारण है मोदीग्रस्त भाजपा की विस्तार वादी नीति.

जो प्रधानमंत्री और उसकी कैबिनेट दिन भर किसी न किसी मुख्यमंत्री से लड़ते रहते हैं, उनके खिलाफ साजिश करते रहते हैं वह कैसे देश चलाएंगे क्योंकि अकेले केंद्र सरकार से देश नहीं चलता है बल्कि राज्यों की ज्यादा बड़ी भूमिका है देश को चलाने में और देश के विकास में और ऐसा इसलिए है क्योंकि भारत बहुत बड़ा देश है, सवा सौ करोड़ की आबादी है और हमारा संवैधानिक ढांचा भी फेडरल है. हो सकता है कि केजरीवाल बेहद अवसरवादी है लेकिन दिल्ली राज्य के संवैधानिक स्थिति को परिवर्तित करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा लाए गए बिल के विरोध में कांग्रेस सहित तमाम विपक्षी दल उसके कंधे पर हाथ रखेंगे क्योंकि ये मोदी ग्रस्त भाजपा सरकार लगातार देश के संवैधानिक फेडरल ढांचे पर चोट कर रही है अपने राज्यपालों एवं केंद्रीय एजेंसियों के द्वारा. अब राज्यों के पास लड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है क्योंकि जीएसटी आने के बाद पैसों के लिए उनकी निर्भरता केंद्र सरकार पर लगातार बढ़ती जा रही है और धीरे-धीरे राज्य सरकारें, केंद्र सरकार की उपनिवेश बनती जा रही है, इसलिए अगर इस बिल के खिलाफ केजरीवाल हिम्मत से लड़ते हैं  तो सभी विपक्षी दल उनका साथ देंगे और केंद्र सरकार को यह बिल वापस लेना होगा क्योंकि आज दिल्ली की बारी है, कल किसी और की बारी होगी जैसे पहले भी जम्मू कश्मीर के साथ हो चुका है.

एक व्यक्ति के तौर पर हिटलर महत्वपूर्ण नहीं है पर महत्वपूर्ण है उसकी विस्तारवादी महत्वकांक्षी सोच, आत्ममुग्धता के कारण उत्पन्न हुआ अंधापन और उसकी गलतियों से सीखे जाने वाले सबक, पर जैसा कि कहा जाता है की जो इतिहास नहीं जानता है वो शापित है उसको दोहराने के लिए.

(लेखक रोहन सिंह उत्तर प्रदेश कांग्रेस से जुड़े हैं और ये उनके निजी विचार हैं)