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मोदी सरकार के 3 कृषि कानूनो के विरोध में चल रहे किसान आंदोलन के दौरान में कुंडली स्थित धरनास्थल पर एक और बुजुर्ग की संदिग्ध अवस्था में मौत हो गई थी.

गांव बैंयापुर के रहने वाले 70 वर्षीय राजेंद्र सरोहा चार दिन से कुंडली धरनास्थल पर मौजूद थे. इससे पहले भी वे धरनास्थल पर आते-जाते रहते थे. अब लगातार चार दिन से गांव रसोई के पास धरनास्थल पर मौजूद थे. वहां बुधवार देर रात अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई. इस पर उन्हें जिला नागरिक अस्पताल में ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया गया. इसके बाद शव को शवगृह में फ्रीजर के अंदर रख दिया गया.

स्वजन व ग्रामीण बृहस्पतिवार सुबह जब अस्पताल में पहुंचे तो उन्हें पता लगा कि राजेंद्र के शव को आंख व पैर के पास से चूहों ने कुतर दिया है. इस कारण खून बह रहा है, इस पर उन्होंने हंगामा शुरू कर दिया.

राजेंद्र के बेटे प्रदीप ने बताया कि रात को शव पर कोई निशान नहीं थे, लेकिन सुबह खून बहता मिला. यह सरासर अस्पताल के कर्मचारियों की लापरवाही है. हंगामे के दौरान शवगृह में पहुंचे सिविल सर्जन डा. जसवंत पूनिया व प्रधान चिकित्सा अधिकारी डा. जयभगवान जाटान ने उन्हें जांच करवा कर कार्रवाई का आश्वासन दिया. इसके बाद ग्रामीण व स्वजन शांत हुए और शव को पोस्टमार्टम के बाद अंतिम संस्कार के लिए ले गए. कुंडली धरनास्थल पर अब तक 19 व्यक्तियों की मौत हो चुकी है.

फूलों से सजी गाड़ी से शव को गांव लेकर पहुंचे ग्रामीण
अधिकारियों के इस भरोसे के बाद राजेंद्र के शव का पोस्टमार्टम कराया गया और पोस्टमार्टम के बाद इसे परिजनों को सौंप दिया गया. ग्रामीण शव को फूलों से सजी गाड़ी में गांव लेकर गए और इस गाड़ी पर तिरंगा भी लहराया गया. ग्रामीणों ने राजेंद्र सिंह अमर रहें और शहीद राजेंद्र सिंह के नारे भी लगाए और कृषि कानूनों को रद्द किए जाने तक आंदोलन जारी रहने की बात कही. ग्रामीणों ने शव पर मालाएं भी चढ़ाईं.